
समोसा विक्रेता 3d मॉडल
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे में कानपुर के पास रामलाल नाम का एक समोसे बेचने वाला दुकानदार रहता था। उसकी छोटी-सी दुकान मुख्य बाजार के कोने पर थी। सुबह होते ही वहाँ गरमा-गरम समोसों की खुशबू फैल जाती और लोग नाश्ते के लिए कतार में खड़े हो जाते। रामलाल मेहनती था, लेकिन पैसों के मामले में बहुत सावधान और थोड़ा सख्त स्वभाव का था। उसी दुकान पर रहीम नाम का एक गरीब आदमी काम करता था। रहीम रोज़ सुबह चार बजे उठकर दुकान पर पहुँच जाता। वह आलू उबालता, मसाले तैयार करता, आटा गूँधता और पूरे मन से समोसे तलता। उसकी उंगलियाँ कई बार जल जातीं, फिर भी वह बिना शिकायत काम करता रहता। घर पर उसकी बीमार पत्नी और दो छोटे बच्चे थे, जिनकी जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी। एक दिन अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बाजार में सन्नाटा छा गया और दुकान पर ग्राहक आना बंद हो गए। कई थाल समोसे तैयार पड़े थे। रामलाल चिंता में डूब गया कि आज भारी नुकसान होगा। तभी रहीम ने विनम्रता से कहा, “मालिक, क्यों न हम ये समोसे पास के बस अड्डे पर बेच आएँ? वहाँ बारिश में फँसे लोग जरूर मिलेंगे।” रामलाल ने पहले संकोच किया, पर फिर हामी भर दी। दोनों ने मिल
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