
3d कौआ पानी घड़ा

एक समय की बात है — एक गर्मी की दोपहर थी। एक प्यासा कौआ (कौआ) जंगल में उड़ता हुआ दूर तक पानी की तलाश कर रहा था। सूरज तेज था और हर पेड़-पौधा सूखा सूखा सा लग रहा था। बहुत देर तक उड़ने के बाद उसे एक छोटा-सा घर और उसके सामने बगीचे में रखा एक घड़ा दिखा। कौए की आँखों में उम्मीद की चमक आ गयी। कौआ घड़े के पास आया और उसके गले के पास झुककर देखा — पर घड़े में पानी बहुत कम था और घड़े का पानी नीचे इतना नीचे था कि कौआ का चोंच उसमें पहुँच ही नहीं पा रहा था। कौआ बहुत प्यासा था। वह एक बार चोंच डालकर भी पानी नहीं पी पाया और निराश हो गया। फिर उसने सोचा, “अगर मैं पानी को ऊपर उठा सकूँ तो मैं पी पाऊँगा।” कौआ ने आस-पास देखा — वहाँ छोटे-छोटे पत्थर बिखरे थे। उसने एक-एक करके पत्थर उठाए और घड़े के अंदर डालने शुरू किये। एक पत्थर, फिर दूसरा, फिर तीसरा… हर पत्थर डालने के बाद कौए ने ध्यान से देखा — पानी थोड़ा-थोड़ा ऊपर उठ रहा था। कौआ ने धैर्य नहीं खोया। उसने और पत्थर डाले—और पानी धीरे-धीरे घड़े के गले तक पहुँचने लगा। जैसे ही पानी भीड़ गया और घड़े का पानी कौए की चोंच तक पहुँच गया, कौआ ने खुशी-खुशी पानी पिया। उसकी प्यास बुझ गयी और वह बहुत प्रस
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