
तराज़ू 3d मॉडल
गाँव का नाम था रामपुर। वहाँ एक बहुत चालाक बनिया दुकानदार रहता था – नाम था लाला किशनलाल। उसकी किराने की दुकान पूरे गाँव में मशहूर थी। लोग नमक, तेल, आटा, दाल सब उसी की दुकान से लेते थे। बाहर से वह बहुत मीठा बोलता, लेकिन अंदर ही अंदर बड़ा घपलेबाज़ था। लाला की आदत थी कि वह तराज़ू में हल्का बाट रखता। एक किलो की जगह नौ सौ ग्राम ही देता, पर दाम पूरे लेता। कभी तेल में पानी मिला देता, तो कभी पुराना चावल नए के नाम पर बेच देता। गाँव वाले उसकी मीठी बातों में आ जाते और उसे ईमानदार समझते। एक दिन गाँव के स्कूल के मास्टरजी को शक हुआ। उन्होंने सोचा, “आज इसकी दुकान की सच्चाई सामने लानी ही होगी।” मास्टरजी ने एक किलो चीनी खरीदी और चुपचाप अपने घर के सही तराज़ू पर तौल कर देखा। चीनी निकली सिर्फ नौ सौ ग्राम! अगले दिन मास्टरजी ने पंचायत बुला ली। गाँव के सरपंच और बाकी लोग भी इकट्ठा हो गए। सबके सामने लाला की दुकान का तराज़ू जाँचा गया। सच सामने आ गया — उसके बाट सच में कम थे। लाला का सिर शर्म से झुक गया। पंचायत ने उसे सख्त चेतावनी दी और कुछ दिनों के लिए दुकान बंद करने का हुक्म दिया। साथ ही कहा कि अगर दोबारा ऐसा किया, तो गाँव से निकाल
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