
मस्जिद 3d मॉडल
रमजान का चाँद जैसे ही नज़र आया, अँधेरी घाटी में बैठा शैतान बेचैन हो उठा। हर साल की तरह इस बार भी Ramadan का महीना शुरू होते ही उसकी ताकत कमज़ोर पड़ने लगी। पहले दिन ही उसने देखा कि मस्जिदों में रौनक बढ़ गई है, लोग रोज़े रख रहे हैं, दुआएँ कर रहे हैं और दिलों में सब्र और रहमत भर रही है। शैतान ने एक घर में फुसफुसाने की कोशिश की, लेकिन रोज़ेदार की ज़ुबान पर “अस्तग़फ़िरुल्लाह” सुनते ही वह पीछे हट गया। उसे एहसास हुआ कि इस महीने में उसकी चालें आसानी से काम नहीं करतीं। दिन बीतते गए। सहरी की रौनक, इफ्तार की खुशबू और रात की तरावीह ने माहौल को इतना पाक बना दिया कि शैतान खुद को बेबस महसूस करने लगा। वह सोचने लगा, “काश लोग पूरे साल ऐसे ही रहें!” आख़िरकार उसने तय किया कि रमजान खत्म होने तक वह दूर ही रहेगा, क्योंकि इस महीने में इंसानों के इरादे उसकी हर साज़िश पर भारी पड़ जाते हैं।
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