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Anonymous1761297304
10-24 09:16
Model Name
युवा पुरुष 3d मॉडल
Tags
character
rendering
realistic
Input
Prompt
राजपुर नाम का एक छोटा-सा गाँव था, जो दिन में तो बहुत शांत दिखता था, लेकिन रात होते ही वहाँ की हवा में कुछ अजीब सरसराहट महसूस होती थी। गाँव के लोग कहते थे कि पुराने बरगद के पेड़ के नीचे किसी ज़माने में “कालकन्या” नाम की चुड़ैल रहती थी, जो काला जादू करती थी। एक रात चार दोस्त – जयदीप, देवांशु, निरंजन और धीरज – ने ठान लिया कि वे चुड़ैल की कहानी का सच जानेंगे। उनके साथ चार लड़कियाँ – रीमा, सृष्टि, प्रिया और तनु – भी थी, जो हिम्मत में किसी से कम नहीं थीं। सबने टॉर्च और मोबाइल लेकर रात के बारह बजे बरगद के पेड़ की ओर जाने की योजना बनाई। गाँव के बाहर जब सब पहुँचे तो हवा ठंडी हो गई, कुत्ते भौंकने लगे और झींगुरों की आवाज़ तेज़ होने लगी। निरंजन बोला, “अगर चुड़ैल सच में है तो मैं उससे सेल्फी लूँगा!” रीमा हँसते हुए बोली, “पहले तू कैमरा चालू तो कर ले, डर से हाथ काँप रहे हैं।” सब हँसने लगे, लेकिन तभी एक अजीब सी “हाऽऽऽ” की आवाज़ आई। सबके रोंगटे खड़े हो गए। धीरज ने टॉर्च घुमाई तो देखा, एक सफ़ेद साड़ी में औरत पेड़ के पीछे खड़ी है। देवांशु बोला, “मम्मी कसम, यह तो वही कालकन्या है!” और धड़ाम से पीछे गिर पड़ा। प्रिया डर के मारे चीखी, पर फिर देखा तो वह “औरत” असल में एक बकरी निकली, जिसके गले में सफेद कपड़ा फँसा हुआ था! सबकी जान में जान आई, और सब ठहाके लगाकर हँस पड़े। फिर भी जयदीप ने कहा, “चुड़ैल तो अभी तक दिखी नहीं, आगे चलते हैं।” जैसे ही वे आगे बढ़े, ज़मीन पर एक पुरानी किताब मिली – उस पर लिखा था “तंत्र-मंत्र रहस्य।” सृष्टि ने मज़ाक में बोला, “चलो, मैं इसमें से कोई जादू पढ़ती हूँ।” उसने ऊँची आवाज़ में कुछ अजीब शब्द पढ़े, और अचानक हवा चलने लगी, दीये बुझ गए, और पेड़ की डाल हिलने लगी। अब तो सबके चेहरों का रंग उड़ गया। जयदीप चिल्लाया, “भागोऽऽऽ!” सब भागते-भागते तालाब तक पहुँच गए। तभी पीछे से वही “हाऽऽऽ” की आवाज़ दोबारा आई — इस बार और ज़ोर से! सब पानी में कूदने ही वाले थे कि पीछे से कोई बोला, “रुको पगलों!” मुड़कर देखा तो वो पंडित हरिदास थे — गाँव के पुजारी। उन्होंने डाँटते हुए कहा, “तुम लोगों ने जो मंत्र पढ़ा, वो चुड़ैल बुलाने का नहीं, मच्छरों को भगाने का है! ये किताब तो मैंने सुखाने रखी थी।” सब एक-दूसरे की शक्ल देखने लगे, फिर ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगे। जयदीप बोला, “तो मतलब चुड़ैल नहीं, सिर्फ़ बकरी और मच्छर थे?” पंडित हँसते हुए बोले, “हाँ बेटा, लेकिन तुम्हारे चेहरे देखकर चुड़ैल भी डर जाए।” अगले दिन गाँव में सबको पता चला तो बच्चे-बच्चे जयदीप, देवांशु, निरंजन, धीरज और उनकी टीम को “भूत पकड़ू गैंग” कहने लगे। आठों दोस्त ने कसम खाई कि अब कभी आधी रात को रोमांच ढूँढने नहीं जाएँगे — लेकिन अंदर-अंदर सब सोच रहे थे कि अगली बार खेतों में किसी और “भूतिया एडवेंचर” पर ज़रूर निकलेंगे! — समाप्त — ChatGPT can make mistakes. Check important info. See Cookie Preferences
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