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DCC Bridge
Anonymous1780377664
06-02 05:27
Model Name
3d मॉडल चरित्र समूह
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character
rendering
stylized
Prompt
रात का वो भयानक नीला साया अब पूरी तरह छंट चुका था। आसमान में सदियों बाद इतनी साफ़ और बेदाग़ सुबह हो रही थी। सूरज की पहली किरण जब पहाड़ की चोटी पर पड़ी, तो कबीर, वीर और आन्या के चेहरों पर थकान तो थी, लेकिन एक अजीब सी आज़ादी का अहसास भी था। इंटरनेट, सिग्नल, और वो ज़हरीला डिजिटल लूप... सब कुछ अब इतिहास बन चुका था। [सीन: पहाड़ की चोटी - सुबह का वक्त] वीर ने ज़मीन पर गिरे हुए नैनो-ड्रोन की राख को अपनी उंगलियों में उठाया। वह राख हवा में साधारण धूल की तरह उड़ गई। वीर (हल्की मुस्कान के साथ): "डैड, यकीन नहीं होता। दिमाग में वो जो एक लगातार 'गूंज' सुनाई देती थी ना... वो बंद हो गई है। सब कुछ कितना शांत है।" आन्या (चारों तरफ देखते हुए): "यह सिर्फ शांत नहीं है, वीर। यह असल ज़िंदगी है। लेकिन सोचो, जो दुनिया पूरी तरह स्क्रीन और सिग्नल्स पर निर्भर थी, वो अब इस सन्नाटे को कैसे झेलेगी?" कबीर ने आगे बढ़कर दोनों के कंधों पर हाथ रखा। उसकी आँखों में एक पिता का गर्व और एक योद्धा का संतोष था। कबीर (गंभीर आवाज़ में): "शुरुआत में तकलीफ होगी, आन्या। लोग घबराएंगे। लेकिन इंसान की फितरत है, वो हर हालात में जी
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