
ram deity 3d model
संतान प्राप्ति की प्रबल इच्छा लिए राजा दशरथ अपने कुलगुरु वशिष्ठ जी के पास गए। गुरु वशिष्ठ की सलाह पर उन्होंने महान तपस्वी श्रृंगी ऋषि को आमंत्रित किया और 'पुत्रकामेष्टि यज्ञ' का आयोजन किया। अग्नि देव का वरदान: यज्ञ की पूर्णाहुति पर यज्ञ कुंड से स्वयं अग्नि देव प्रकट हुए। उन्होंने राजा दशरथ को खीर (पायस) से भरा एक स्वर्ण पात्र दिया और कहा कि इसे अपनी रानियों को खिला दें। खीर का वितरण: राजा दशरथ ने वह खीर अपनी तीनों रानियों में बांट दी। अवतार का जन्म: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि (जिसे आज हम राम नवमी के रूप में मनाते हैं) को पुनर्वसु नक्षत्र में माता कौशल्या के गर्भ से श्री राम ने जन्म लिया, जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार थे। भाइयों का जन्म: उसी दिन माता कैकेयी ने भरत को और माता सुमित्रा ने लक्ष्मण व शत्रुघ्न को जन्म दिया। चारों पुत्रों के जन्म की खबर सुनते ही पूरी अयोध्या नगरी में उत्सव का माहौल छा गया और देवताओं ने आकाश से पुष्प वर्षा की।
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