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Anonymous1760776428
10-18 08:44
Model Name
undead creature 3d model
Tags
creatures & animals
game asset
realistic
Input
Prompt
🌕 “पुराने कुएँ की चुड़ैल” एक छोटे से गाँव के किनारे एक बहुत पुराना कुआँ था। कहते हैं, उस कुएँ से कई साल पहले एक औरत की लाश मिली थी — बाल बिखरे हुए, लाल साड़ी में लिपटी, और आँखें फटी हुईं। तब से गाँव वालों ने उस कुएँ को "चुड़ैल वाला कुआँ" कहना शुरू कर दिया। दिन में तो सब कुछ सामान्य लगता, लेकिन रात होते ही उस कुएँ से अजीब सिसकियाँ और हँसी सुनाई देतीं। कई बार किसी ने पास जाने की कोशिश की, तो हवा ठंडी पड़ जाती, और कोई अदृश्य ताकत उन्हें पीछे धकेल देती। एक बार, राजू नाम का एक लड़का, हिम्मत दिखाने के लिए, दोस्तों की चुनौती पर रात के बारह बजे उस कुएँ के पास गया। दोस्तों ने दूर से टॉर्च की रोशनी डाली — कुएँ के पास राजू खड़ा था। उसने झाँककर अंदर देखा, और ज़ोर से बोला — “कोई है यहाँ?” पहले तो कुछ नहीं हुआ, फिर कुएँ से एक महिला की धीमी आवाज़ आई — “राजू... नीचे आओ…” राजू के चेहरे का रंग उड़ गया। दोस्तों ने देखा, वह धीरे-धीरे झुकने लगा, जैसे किसी ने खींच लिया हो। उन्होंने चिल्लाया, दौड़कर पहुँचे, लेकिन कुएँ के पास बस उसकी चप्पलें पड़ी थीं… राजू कभी वापस नहीं आया। अगले दिन, कुएँ का पानी लाल रंग का था — जैसे किसी ने उसमें खून घोला हो। और तब से, हर पूर्णिमा की रात, कुएँ के पास किसी के हँसने और चूड़ियों की खनक की आवाज़ आती है… लोग कहते हैं — वो चुड़ैल अब भी किसी को अपने साथ नीचे खींचने का इंतज़ार कर रही है। 🌑 “कुएँ के अंदर” कहते हैं, चुड़ैल जिसे भी खींच ले जाती है, वो कभी लौटता नहीं… पर राजू के साथ जो हुआ, वो किसी ने सोचा भी नहीं था। जब वो कुएँ में गिरा, तो उसे लगा जैसे वह किसी अंधेरे सुरंग में उतर रहा हो। चारों तरफ़ ठंडक थी — इतनी कि उसकी साँसें जमने लगीं। लेकिन नीचे गिरते-गिरते उसे महसूस हुआ कि कोई नरम हाथ उसे थामे हुए हैं। वो ज़मीन पर नहीं गिरा — बल्कि किसी ने उसे धीरे से रखा। धीरे-धीरे उसकी आँखें अंधेरे में कुछ देखने लगीं… और उसने देखा — सामने एक औरत खड़ी थी। लंबे बाल, लाल साड़ी, और चेहरा अधजला हुआ। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम आ ही गए, राजू… मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी।” राजू काँप गया — “कौन… कौन हो तुम?” वो बोली, “इस कुएँ में मेरे साथ धोखा हुआ था। उन्होंने मुझे ज़िंदा फेंक दिया था। अब हर साल मैं एक आत्मा बुलाती हूँ… ताकि मैं अकेली न रहूँ।” राजू पीछे हटने लगा, लेकिन चारों तरफ़ हड्डियों के ढेर पड़े थे। उसने देखा — हर हड्डी पर किसी का नाम लिखा था — रमेश, मोहन, सुरेश… सब वही लड़के जो सालों से लापता थे। और तभी, चुड़ैल ने अपना हाथ उसकी गर्दन पर रखा — “अब तुम्हारा नाम भी इसमें जुड़ जाएगा।” राजू चिल्लाया — लेकिन उसकी आवाज़ कुएँ की गहराई में गुम हो गई। --- अगली सुबह, गाँव वाले फिर कुएँ के पास पहुँचे। इस बार कुएँ के किनारे मिट्टी में कुछ लिखा था — > “मुझे अकेला मत छोड़ो…” और नीचे, खून से लिखा एक नाम था — राजू। 🌘 “आख़िरी रात” राजू के गायब होने के कई महीने बीत गए। गाँव वालों ने कुएँ के चारों ओर दीवार बना दी, पूजा करवाई, और उस जगह को छोड़ दिया। कहा जाता था — अब सब शांत है। लेकिन एक दिन राजू की बहन, राधा, उस कुएँ के पास पहुँची। वो अपने भाई को ढूँढने आई थी। सबने मना किया, पर उसने कहा — “अगर वो वहीं है… तो मैं उसे वापस लाऊँगी।” रात के बारह बजे, वो अकेली पहुँची। हवा भारी थी, चाँद पूरा था, और आसमान में कोई आवाज़ नहीं थी। राधा ने कुएँ के पास दीया रखा और धीरे से बोली — “राजू… अगर तू है, तो बस एक बार बोल दे…” कुएँ के अंदर से पानी की हल्की लहरें उठीं, और किसी की फुसफुसाहट आई — “राधा… भाग जा…” राधा का दिल जोर से धड़कने लगा। लेकिन तभी, कुएँ के अंदर से वही लाल साड़ी वाली औरत निकली — बाल हवा में उड़ रहे थे, चेहरा आधा सड़ चुका था, और उसकी आँखें धधक रही थीं। वो बोली — “एक बार जो मेरा हो गया, वो कभी वापस नहीं जाता…” राधा ने काँपते हुए हाथ में पवित्र राख निकाली और कुएँ में फेंकी — चारों तरफ़ अग्नि की लपटें उठीं। चुड़ैल दर्द से चीखी — आवाज़ इतनी तीखी कि पेड़ हिलने लगे। उसका चेहरा राख में बदल गया, और उसके साथ कुआँ धीरे-धीरे भरने लगा — पानी, मिट्टी, और राख… सब कुछ भीतर समा गया। सुबह जब गाँव वाले आए, तो वहाँ अब कोई कुआँ नहीं था — बस ज़मीन पर एक चाँदी का चूड़ी का टुकड़ा पड़ा था। राधा भी कहीं नहीं मिली… लेकिन कहते हैं — पूर्णिमा की रात, अगर कोई उस जगह के पास जाता है, तो हवा में एक धीमी आवाज़ सुनाई देती है — > “भैया… अब हम साथ हैं…
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