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Ramen shop 3D Models

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Anonymous1747148132
Anonymous1773283837
Anonymous1773295440
chỉnh sửa không gian quầy phở
Anonymous1773285465
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Anonymous1773239283
Anonymous1762830821
해당 제품을 360도 어디로든 회전할수있게 3d로 변환해줘.
앞뒤가 동일한 이미지면 될것같아
Anonymous1772604914
Anonymous1771200070
белая бумажная коробочка с крупной толстой лапшой и наруто , торчат китайские деревянные палочки для еды. казуальный стиль
Anonymous1772131578
китайская бумажная коробочка с лапшой и наруто , торчат китайские деревянные палочки для еды
Anonymous1772131578
शहर के एक पुराने मोहल्ले में, एक छोटी-सी गली के कोने पर रामलाल की समोसे की दुकान थी। दुकान क्या थी—एक लकड़ी की रेहड़ी, ऊपर नीली तिरपाल, और सामने कढ़ाही में खौलता हुआ तेल। लेकिन इस साधारण-सी दिखने वाली दुकान के समोसे पूरे इलाके में मशहूर थे। लोग कहते थे, “रामलाल के समोसे में कोई जादू है।”
Anonymous1771420195
Anonymous1748916883
Anonymous1771727867
Anonymous1770727306
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे में कानपुर के पास रामलाल नाम का एक समोसे बेचने वाला दुकानदार रहता था। उसकी छोटी-सी दुकान मुख्य बाजार के कोने पर थी। सुबह होते ही वहाँ गरमा-गरम समोसों की खुशबू फैल जाती और लोग नाश्ते के लिए कतार में खड़े हो जाते। रामलाल मेहनती था, लेकिन पैसों के मामले में बहुत सावधान और थोड़ा सख्त स्वभाव का था।
उसी दुकान पर रहीम नाम का एक गरीब आदमी काम करता था। रहीम रोज़ सुबह चार बजे उठकर दुकान पर पहुँच जाता। वह आलू उबालता, मसाले तैयार करता, आटा गूँधता और पूरे मन से समोसे तलता। उसकी उंगलियाँ कई बार जल जातीं, फिर भी वह बिना शिकायत काम करता रहता। घर पर उसकी बीमार पत्नी और दो छोटे बच्चे थे, जिनकी जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी।
एक दिन अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बाजार में सन्नाटा छा गया और दुकान पर ग्राहक आना बंद हो गए। कई थाल समोसे तैयार पड़े थे। रामलाल चिंता में डूब गया कि आज भारी नुकसान होगा। तभी रहीम ने विनम्रता से कहा, “मालिक, क्यों न हम ये समोसे पास के बस अड्डे पर बेच आएँ? वहाँ बारिश में फँसे लोग जरूर मिलेंगे।”
रामलाल ने पहले संकोच किया, पर फिर हामी भर दी। दोनों ने मिलकर टोकरी उठाई और बस अड्ड
Anonymous1771788867
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे में कानपुर के पास रामलाल नाम का एक समोसे बेचने वाला दुकानदार रहता था। उसकी छोटी-सी दुकान मुख्य बाजार के कोने पर थी। सुबह होते ही वहाँ गरमा-गरम समोसों की खुशबू फैल जाती और लोग नाश्ते के लिए कतार में खड़े हो जाते। रामलाल मेहनती था, लेकिन पैसों के मामले में बहुत सावधान और थोड़ा सख्त स्वभाव का था।
उसी दुकान पर रहीम नाम का एक गरीब आदमी काम करता था। रहीम रोज़ सुबह चार बजे उठकर दुकान पर पहुँच जाता। वह आलू उबालता, मसाले तैयार करता, आटा गूँधता और पूरे मन से समोसे तलता। उसकी उंगलियाँ कई बार जल जातीं, फिर भी वह बिना शिकायत काम करता रहता। घर पर उसकी बीमार पत्नी और दो छोटे बच्चे थे, जिनकी जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी।
एक दिन अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बाजार में सन्नाटा छा गया और दुकान पर ग्राहक आना बंद हो गए। कई थाल समोसे तैयार पड़े थे। रामलाल चिंता में डूब गया कि आज भारी नुकसान होगा। तभी रहीम ने विनम्रता से कहा, “मालिक, क्यों न हम ये समोसे पास के बस अड्डे पर बेच आएँ? वहाँ बारिश में फँसे लोग जरूर मिलेंगे।”
रामलाल ने पहले संकोच किया, पर फिर हामी भर दी। दोनों ने मिल
Anonymous1771788867
깔끔한 상점 부스를 만들어줘 로블록스 게임에 쓸만하게
Anonymous1771655523
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