
3d मॉडल मिट्टी का घर
गाँव के किनारे एक छोटा-सा कच्चा घर था, जिसमें रामू नाम का एक गरीब किसान अपनी पत्नी सीता और दो बच्चों के साथ रहता था। रामू के पास बस दो बीघा जमीन थी, वही उसकी दुनिया थी और वही उसका सहारा। हर सुबह सूरज उगने से पहले ही वह खेतों की ओर निकल जाता। कंधे पर हल, हाथ में फावड़ा और आँखों में उम्मीद लिए वह दिन-भर मेहनत करता। उस साल बारिश देर से आई थी। आसमान में बादल तो घिरते, पर बरसते नहीं थे। सूखी मिट्टी को देखकर रामू का दिल बैठ जाता। घर में अनाज भी कम बचा था। सीता उसे हिम्मत देती, “चिंता मत करो, भगवान मेहनत का फल जरूर देगा।” बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च सोचकर रामू और भी जी-जान से जुट जाता। आखिरकार एक दिन काले बादल घिरे और तेज बारिश शुरू हो गई। सूखी धरती ने पानी को ऐसे सोखा जैसे बरसों से प्यासा हो। रामू की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उसने बीज बोए और दिन-रात खेत की देखभाल करने लगा। कभी कीड़ों से फसल को बचाता, तो कभी नालियों से पानी का बहाव ठीक करता। समय बीतता गया और खेत में हरी-भरी फसल लहलहाने लगी। सुनहरी बालियाँ हवा में झूमतीं तो रामू का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता। कटाई के दिन जब उसने अनाज की ढेरियाँ देखीं, तो उसकी सा
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